मंगलवार, 10 सितंबर 2019

आखिरी मुलाकात

हमारी आज आखिरी मुलाकात हुई।
कहने को थे अल्फ़ाज़ बहुत
मगर कुछ भी न बात हुई।

चेहरे थी उदासी भरी
लबों पर थी नमी छाई।
करीब तो थे हम मगर
वक्त ने दूरियां बढ़ाई।

हर वक़्त जो प्यार से पेश आते थे
अचानक बेरूखी से बातें करने लगे।
जब पता किया तीखे तेवर का
तो मालूम चला हमारी अब जरूरत नहीं।

रविवार, 11 अगस्त 2019

नया सफर, नया है डर

आज हमारी दुआ दिल से कुबूल हुई
जो चाहा था खुदा से, वो खुशी मिली ।
अब मुझे जानने चार यार मिले
पूछते हैं हमेशा, कैसी चल रही जिंदगी ।

मैं सवार हुआ उस कश्ती में
जो मेरे लिए थी बिल्कुल नई ।
जो जान चुके थे, परख चुके थे
वो संभाल रहे थे किसी दूसरे छोर से ही ।

मैं ठहरा बेचारा, चल दिया जैसे आवारा
वो कहते रहे, मैं सोचता रहा
क्या डूब जाएगी कश्ती रास्ते में ही ?

पर हौसला बढ़ा, दिल में फैसला हुआ
मैं आगे चला, मन में सोचता चला
अब मुझे रुकना नहीं
चाहे रुकावटें मिले कैसी भी ।

शनिवार, 10 अगस्त 2019

ये कैसी है बेरुखी

उनके अल्फाजों में अचानक बेरूखी नजर आई
वो किस बात से खफा थे, ये समझ नहीं आई ।
कुछ वक्त गुजारे थे हमने उनके साथ
लेकिन ऐसा एहसास नहीं हुआ
उन्होंने कभी हमारे साथ यारी नहीं निभाई ।

कुछ ही वक्त हुए थे उन्हें पहचाने हुए
कभी हम उनको जान नहीं पाए ।
साथ बैठते थे, हर बात साझा करते थे
लेकिन पता नहीं क्यों
वो मन की बात को मन में दबाते चले गए ।

जब हमने पूछा, क्या हुआ है बताओ
वो बोले कुछ नहीं कहना, तकलीफ़ नहीं बढ़ाओ ।
हम अब साथ नहीं, आगे कोई बात नहीं
लबों को हद में रखो, हमें नाराजगी नहीं दिलाओ ।