चलो आज तुम्हें एक पुरानी यादें ताजा कराता हूँ।
मन की बातों को शब्दों की जुबानी बताता हूँ।
क्या तुम्हें वो पल याद है
जब हम पहली बार मिले थे?
जब हम एक-दूसरे से बिल्कुल अंजान थे।
नहीं ना!
लेकिन मुझे याद है
मौसम थोड़ा सुहाना था।
आकाश में बादल भी छाए हुए थे
सड़क पर थोड़ी-सी आवाजाही थी।
फिर हमने एक जगह बैठने की तय की
क्योंकि समय की भी पाबंदी थी
संयोग से दोनों को कॉफी पसंद थी।
तुमने अपने बारे में बताया
और मैंने अपने बारे में बताया।
बातों ही बातों में कुछ चीजें दोनों की मिलने लगी।
इस पहली मुलाकात के बाद
अक्सर ही हम मिलने लगे
एक-दूसरे को जानने लगे।
फिर एक ऐसी दोस्ती की शुरुआत हुई
जो वक्त के साथ और गहरी हो गई।
अब जब कभी हम मिलते हैं
कुछ ऐसी बातें भी साझा कर लेते हैं
जिससे दिल को सुकून मिल जाता है।
Welcome to my Hindi poetry blog. This space is dedicated to realistic, meaningful, & profound Hindi poetry that reflects emotions, experiences, and the deeper facets of life. Through my words, my aim is to express feelings and thoughts with which many people can resonate. If you enjoy reading my poems and connect with them, I would be truly grateful. Your support and encouragement inspire me to continue sharing my creativity through poetry.
रविवार, 20 अक्टूबर 2024
वो पहला मिलन
सोमवार, 12 फ़रवरी 2024
कहानी ... कुछ सवालों के साथ
कुछ अलग करने की जो अंदरुनी जिद्द थी।
इसे पाना सबसे बड़ी मुश्किल थी।
है सफर लंबा, ये मन को मालूम था।
बस शुरू करने के लिए रास्ते पर निकलना था।
थोड़ा समय खराब चल रहा था, लोग थोड़े नाराज थे।
कुछ हासिल जो करना था, सो कुछ खोए जा रहे थे।
कुछ बातें लगती थी अच्छी, कुछ बुरी लग रही थी।
कुछ चीजें दे रही थी खुशी, कुछ दुख पहुंचा रही थी।
मुकाम सोचा था ऐसा, जिसे पा लेना ही एकमात्र विचार था।
इस पर निशाना साधना ही, कोई ज्यादा बड़ा काम न था।
रूकने का कोई कारण न था, आगे बढ़ना में कोई बाधा न था।
ठानी है जो मन में, इसे छोड़ने का अब कोई इरादा न था।
चलो इस कहानी को यहीं विराम देते हैं।
क्यों न हम नई कहानी की बातें करते हैं।
कुछ बातें तुम बताओ, कुछ अपनी बताते हैं।
लेकिन इससे पहले, सबको साथ कर लेते हैं।
थे हम सब एक दूसरे के लिए बिल्कुल नए।
पहचान बनाने में ही कुछ ज्यादा वक्त बीत गए।
फिर हुआ कुछ ऐसा, माहौल बदल गया।
जैसे एक ही पल सबका असली रंग दिख गया।
कोई हुआ किनारा, कोई साथ चलता रहा।
कोई नए मुखड़े के साथ सबसे मिलता रहा।
कोई बना अनजान, कोई जानकर छिपता रहा।
कोई नजरें मिलाने से हर क्षण डरता रहा।
किसी ने माना दोस्त, किसी ने यारी खत्म की।
साथ बैठकर भी इशारों में बातें होती रही।
अंदर में रहे अच्छे, बाहर दूर खड़े रहे।
दिखावे की नजरों से हर जवाब दे गए।
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