रविवार, 21 जून 2026

एक दिल... खोया हुआ और ख़ामोश

 इक दास्तान सुनाता हूं, कुछ यूं हुआ।

सब बोलते रहे,

एक दूसरे की सुनते रहे।

जब नज़र गई एक कोने में 

कुछ अजीब नज़रों से देखा गया 

फिर बस यही पूछा गया 

तुम ऐसे क्यों बैठे हो चुपचाप?

कुछ बोलते क्यों नहीं?

क्यों इस तरह गुमसुम हो?

जब वो सवाल सुनने लगा 

सबकी टेढ़ी नजर को देखने लगा 

तो सिर्फ इतना ही बोला -

हूं ख़ामोश तो ख़ामोश ही रहने दो 

इस शांत मन को शांति ही रहने दो।

ग़र ये लब खुले तो हो जाओगे तबाह,

हैं जो भी सवाल, उसे अंदर ही दबा रहने दो।

इस दिल में छुपी है कई बात, जो सुन न पाओगे 

न खुश हो पाओगे, न दुखी हो पाओगे।

आ जाएगा बवंडर, बातों के लहरों में छिपकर,

न खुद बच पाओगे, न किसी को बचा पाओगे।

कोशिश भी नहीं करना, इस दिल में झांकने की

हो जाओगे ख़ाक बस इक पल में ही।

रखो खुद को संभाल कर इस बेदर्द जहां में 

नहीं तो ज़ख्म लिए फिरोगे 

इस तरह जमाने में ही।

गुरुवार, 11 जून 2026

अलविदा जहां

न कोई गुफ्तगू होगा, न हाल-ए-दिल बयां होगी,

बस दूर चले जाने की जिद्द होगी।

न कोई तकल्लुफ़ होगा, न तार्रुफ होगी,

बस मन ही मन में हर बात होगी।


न होगी गुंजाइश किसी बहस की,

न सामना बेवज़ह के बातों का होगा।

न होगी तकलीफ़ लड़ने झगड़ने की,

न सिलसिला किसी मुलाक़ातों का होगा।


न होगी शिक़ायत कोई भी चीज़ों की,

न मलाल किसी ख़ुशी या ग़म का होगा।

न रहेगा गिला शिकवा दिलों के बीच में,

दिलों का बात बस दिलों में ही छिपा रहेगा।


न मिलेंगी नज़रें, न कुछ नज़र अंदाज़ होगा,

आंखों में अश्क लेकिन लब शांत होगा।

कहने को होंगे अल्फाज़ बहुत सारे,

पर सुनने वाला वो दिल साथ न होगा।

रविवार, 20 अक्टूबर 2024

वो पहला मिलन

चलो आज तुम्हें एक पुरानी यादें ताजा कराता हूँ।
मन की बातों को शब्दों की जुबानी बताता हूँ।
क्या तुम्हें वो पल याद है
जब हम पहली बार मिले थे?
जब हम एक-दूसरे से बिल्कुल अंजान थे।
नहीं ना!
लेकिन मुझे याद है
मौसम थोड़ा सुहाना था।
आकाश में बादल भी छाए हुए थे
सड़क पर थोड़ी-सी आवाजाही थी।
फिर हमने एक जगह बैठने की तय की
क्योंकि समय की भी पाबंदी थी
संयोग से दोनों को कॉफी पसंद थी।
तुमने अपने बारे में बताया
और मैंने अपने बारे में बताया।
बातों ही बातों में कुछ चीजें दोनों की मिलने लगी।
इस पहली मुलाकात के बाद
अक्सर ही हम मिलने लगे
एक-दूसरे को जानने लगे।
फिर एक ऐसी दोस्ती की शुरुआत हुई
जो वक्त के साथ और गहरी हो गई।
अब जब कभी हम मिलते हैं
कुछ ऐसी बातें भी साझा कर लेते हैं
जिससे दिल को सुकून मिल जाता है।