गुरुवार, 11 जून 2026

अलविदा जहां

न कोई गुफ्तगू होगा, न हाल-ए-दिल बयां होगी,

बस दूर चले जाने की जिद्द होगी।

न कोई तकल्लुफ़ होगा, न तार्रुफ होगी,

बस मन ही मन में हर बात होगी।


न होगी गुंजाइश किसी बहस की,

न सामना बेवज़ह के बातों का होगा।

न होगी तकलीफ़ लड़ने झगड़ने की,

न सिलसिला किसी मुलाक़ातों का होगा।


न होगी शिक़ायत कोई भी चीज़ों की,

न मलाल किसी ख़ुशी या ग़म का होगा।

न रहेगा गिला शिकवा दिलों के बीच में,

दिलों का बात बस दिलों में ही छिपा रहेगा।


न मिलेंगी नज़रें, न कुछ नज़र अंदाज़ होगा,

आंखों में अश्क लेकिन लब शांत होगा।

कहने को होंगे अल्फाज़ बहुत सारे,

पर सुनने वाला वो दिल साथ न होगा।