सोमवार, 30 मई 2016

सांझ-सवेरा

मेरी हंसी, मेरी खुशी तुम हो|
मेरी आदत, मेरी चाहत तुम हो|
मेरे अंधेरे की रौशनी तुम हो|
मेरी मुस्कान की चांदनी तुम हो|
मेरे लबों की आवाज तुम हो|
मेरे गुमशुमपन का राज तुम हो|
मैं अगर जिन्दा हूँ तो जिंदगी तुम हो|
मैं अगर दिल हूँ तो दिल्लगी तुम हो|
मैं अगर रूठा हूँ तो मना तुम लेना|
मैं अगर गम में हूँ तो खुशी तुम देना|
मैं अगर चला जाऊँ तो रोक तुम लेना|
मैं अगर चुप हूँ तो बोल तुम देना|
मेरी हिम्मत, मेरी ताकत तुम बनना|
मेरी हर जीत की खुशी तुम बनना|
मैं अगर खो जाऊँ तो पास तुम रहना|
मैं अगर दूर रहूँ तो एहसास तुम रहना|
मेरे हर नजर का नजरिया तुम बनना|
मेरी हर खुशी का जरिया तुम बनना|

रविवार, 29 मई 2016

आने वाला पल

जिन्दगी के सफर में
रोज नया तूफान खरा |
तू क्या सोच रहा है
कुछ आगे करके दिखा |

ये पल बीत जाएगा
ये कल कभी न आएगा |
जो बीत गया वो बीत गया
कुछ करने की सोच जरा |

तुमने जो किया अब तक
उसे अपने सोच से हटा दे |
तेरे साथ क्या होगा अब
ये सबको तू बता दे |

तेरी जब कभी ये
ज़िन्दगी बर्बाद होगी |
तु मौत का मुंह का देखेगा
तेरी जब वो हाल होगी |

लंबा सफर तय करना है तूझे
अभी कहीं नहीं पहुँचा है |
इस सफर का अंत ना होगा
तू क्या सोच रहा है |

तेरी स्थिति ठीक नहीं है
कुछ समय के लिए |
इस पल को बर्बाद ना कर
आने वाले समय के लिए |

आने वाले कुछ समय में
लोग बदल जब जायेंगे |
आने वाले पल को जब
लोग समझ ना पाएंगे |

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

तड़पता मन, क्रोधित पवन

वो ढूंढती थी, वो सोचती थी,
वो चारो ओर बस घूमती थी
जब हार गयी, जब ना पार गयी
जब ये बात आखिर मान गयी
जब कोई ना दिखा सहारा
जब फिर मन हो गया बेचारा
तो वो थक गयी, वो विवश हुई
आंसुओं के संग वो मग्न हुई
वो रोती रही, बिलखती रही
खुद को खुद से संभालती रही
हर दिन, हर क्षण, हर पहर
बंद कमरे मे तड़पता मन
सब हैं साथ में फिर भी
कैद-सा लगता है जीवन
सहेलियों के संग हूँ,
फिर भी दबी-दबी सी हूँ
अपने आँगन में हूँ,
पर डरी हुई सी हूँ
हर रोज़ जाती हूँ पढ़ने को
शिक्षा-गृह में अपने सहेलियों के संग
वो पूछती हैं रोज़ मुझसे
क्या तकलीफ है, बताओ ना हमें भी
जाते वक़्त ये सोचती हूँ
हर रोज़ की तरह हर पल यही
किससे कहूँ, क्या सब कहूँ
पर मैं आंसुओं को पोछकर
खुशियों में मग्न हो जाती हूँ
ताकि किसी को भनक ना लगे
की मैं किस मुश्किलों में जीती हूँ