शुक्रवार, 25 मार्च 2016

तड़पता मन, क्रोधित पवन

वो ढूंढती थी, वो सोचती थी,
वो चारो ओर बस घूमती थी
जब हार गयी, जब ना पार गयी
जब ये बात आखिर मान गयी
जब कोई ना दिखा सहारा
जब फिर मन हो गया बेचारा
तो वो थक गयी, वो विवश हुई
आंसुओं के संग वो मग्न हुई
वो रोती रही, बिलखती रही
खुद को खुद से संभालती रही
हर दिन, हर क्षण, हर पहर
बंद कमरे मे तड़पता मन
सब हैं साथ में फिर भी
कैद-सा लगता है जीवन
सहेलियों के संग हूँ,
फिर भी दबी-दबी सी हूँ
अपने आँगन में हूँ,
पर डरी हुई सी हूँ
हर रोज़ जाती हूँ पढ़ने को
शिक्षा-गृह में अपने सहेलियों के संग
वो पूछती हैं रोज़ मुझसे
क्या तकलीफ है, बताओ ना हमें भी
जाते वक़्त ये सोचती हूँ
हर रोज़ की तरह हर पल यही
किससे कहूँ, क्या सब कहूँ
पर मैं आंसुओं को पोछकर
खुशियों में मग्न हो जाती हूँ
ताकि किसी को भनक ना लगे
की मैं किस मुश्किलों में जीती हूँ

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

छूटता आँचल

है शौक वही, पर शौक नयी नहीं
है साथ वही, पर साथ नहीं
हूँ दूर सही, पर मजबूर नहीं
हूँ निर्भीक, पर नजदीक नहीं
है ये सब विचार उस मन से
है एक सवाल उन सब जन से
जो आ रहे हैं या जो जा रहे हैं
क्या वो मेरे हैं या क्या वो आपके थे ?
मित्र कहूँ या शत्रु, समझ नहीं मुझे आ रहा
पर मैं हूँ शांत, है एक विश्वास
आने-जाने वालों पर नहीं,
खुद पर है विश्वास
मेरा एक साथी है
जो समंदर के दूसरी छोर पर बैठा है
एक ऐसे छोर पर बैठा है
जहां से वो सिर्फ ये देख रहा है
ये सोच रहा है
की वो दिन कब आएगा
जिस दिन वो मुझसे मिल पाएगा

सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

टूटी सड़क......(अर्धसत्य)

तुझमे और मुझमे बहुत फर्क है यारा
तू दिल के लिए खुश है
और मैं दिल से बहुत खुश हूँ
तुझे अपनों के साथ प्यार मिला
और मुझे गैरो ने हंसा दिया
रूठे यार को मनाना मुझे आता नहीं
और यार रूठ जाये तो मैं रह सकता नहीं
मेरे विचार कैसे बदल गए
ये मैं भी नहीं समझ पाया
जब ढूँढना चाहा खुद को
तो आईने में तड़पता चेहरा नज़र आया
ज़िंदगी में खुशी और हंसी सभी को चाहिए
तूने खुद को खुशी के माहौल में ढाले रखा
और मैं बेचैनी से खुशी तलाशता रहा
तू ज़िंदगी को करीब से जान रहा
पर मैं ज़िंदगी को करीब आने से रोक रहा
हर दिन हर पल यही सोचता हूँ
की जब कोई खुशी से मेरे साथ होगी
तो क्या मैं संयम के साथ रह पाऊँगा
पर एक ऐसा शख्स भी मुझे मिला
जिसने मुझे वो सब कुछ फिर से सिखाया
जो मैं हर समय से चाहता था
उसने मुझे जीना सिखाया
जीने के साथ हँसना सिखाया
और मुझसे बोला
अब खुद को कभी अंधेरे मे मत रखना
मैं तुम्हारे साथ हूँ
मैं तुम्हें प्यार दूँगा
मैं तुम्हारा सच्चा यार बनूँगा
पर तुम कभी आँसू मत बहाना
पर कभी-कभी ऐसा सोचता हूँ
क्या सच में ऐसा है ?
क्या सच में ऐसा होगा ?
लेकिन जब बीते हुए,
दर्द भरे लम्हे याद आते हैं
तो अचानक ऐसा ख्याल आ जाता है
जब मेरा दिल किसी के काबिल नहीं
जब मेरी हंसी किसी की खुशी नहीं
तो किसी के साथ मेरा जुड़े रहना जायज़ नहीं