शनिवार, 4 अक्टूबर 2014

जाग जाओ मित्र

यूँ देर तक मैं सोया हुआ था
तभी किसी ने आकर मुझसे कहा ---
उठ जाओ ! नया सवेरा देखो,
नयी मंज़िल देखो
तुम्हारा इंतज़ार ख़त्म हुआ !
मैंने जब उठ कर देखा तो
कई सारी नयी राह दिख रही थी !
मुझे लगा अब जाग जाना चाहिए
अब आगे बढ़ना चाहिए !
मैं कोशिश करके जब आगे बढ़ा
तो देखा कई मित्र
बहुत आगे बढ़ चुके हैं !
मैंने सोचा अब अकेले ही
आगे बढ़ना चाहिए
और उनके साथ जाना चाहिए !

बुधवार, 20 अगस्त 2014

अधूरी ख़्वाहिश

लबों को लबों से आज़ छू जाने दो !
दिल धड़कता है तो धड़क जाने दो !
यूँ मत तड़पाओ तुम मुझे आज
ज़ी भर के बाहों में खो जाने दो !

तुझसे दूर होने का डर रहता है इस दिल को
अपनी मोहब्बत का इज़हार हो जाने दो !
चाहता हूँ तुम्हें हद से भी ज्यादा
आज अपनी तमन्ना पूरी हो जाने दो !

वादा किया था रब से, चाहूंगा तुम्हें शाम-सवेरे
तेरी हर ख़्वाहिश पूरी करूँगा दिल से !
मेरे हर वादे को दिल से गुज़र जाने दो
ख्वाबों से निकला हूँ, हकीकत में आ जाने दो !

मंगलवार, 19 अगस्त 2014

मुझे मत मारो

हज़ारो दावतें हमने अब तक दी हैं !
सबकी चाहतें हमने पूरी की की हैं !
यूँ रूठ कर जाने वाले, तुझे क्या हुआ
तेरी कौन-सी ख्वाहिशें, अधूरी छोड़ी हैं !

बिखर चुके हैं हम टुकड़ों में हर जगह !
किसी को है तकरार, कोई चाहता है इस तरह !
किसी के मन में है मेरे लिए मोहब्बत
कोई नहीं चाहता जीते रहे हम इस तरह !

इस कदर मुझे मत मारो !
हो सके तो खुद को संभालो !
अगर मैं ना तो तुम भी नहीं रहोगे
सोचो, मैं चला गया तो तुम क्या करोगे ?