बुधवार, 6 अप्रैल 2011

ऐ बेखबर...

ज़िन्दगी एक दोस्त थी
 दोस्त बनकर न रही!
ज़िन्दगी एक किताब थी
जिसकी मैंने केवल
एक-दो पन्ने पढ़ी!
ज़िन्दगी के इस खेल में
मैंने ऐसा किया
जिससे मेरी दुश्मनी हो गयी!    




गुरुवार, 31 मार्च 2011

विश्व कप हमारा है

नए जोश के साथ उतरे हैं
हम अपने खेल मैदान पर!
चोकों-छक्कों की बरसात करने
हम आये हैं आपकी मुस्कान पर!
हममे नया विश्वाश जगा है!
हममे नया जोश भरा है!
हमे आपका भरोसा मिला है!
हमे आपका प्यार मिला है!
हममे नया उत्साह जगा है!
हममे नया आत्मविश्वाश भरा है!
हमने ठानी उस कप को पाने की
जिसका इंतजार आप वर्षों से कर हैं!
हमने ठानी है उस कप को पाने की
जिसे कई देशो ने सोची है अपने पास लाने की!
हम हैं वो जवान
जो सीमा पर जाकर
दुश्मनों को मारते हैं!
हम हैं वो पहचान
जो आपके साथ
कदम मिलाकर चलते हैं!
फिर से खेलेंगे
फिर से जीतेंगे
विश्व कप हमारा है! 

शनिवार, 8 जनवरी 2011

एक अजीब-सा एहसास

एहसास
किसी अजनबी का!
एहसास
एक ज़िन्दगी का!
एहसास
एक दोस्त का!
एहसास
मेरे अपने का!
एहसास
हर पल का!
एहसास
तुमसे मिलने का!
एहसास
वो चीज़ है

जो कभी भी हो सकती है!