शनिवार, 4 अगस्त 2018

वक्त का संघर्ष

तु चला जा पीछे वक्त
संभाल अपने समय को
मैं संभाल लूंगा अपने आप को |
मत कर मुझे परेशान
मेरे गुजरे हुए वक्त को लेकर
मैं नहीं चाहता
कोई देखे मेरे बिगड़े हुए छाप को |
लो आ गया मौसम
तेरे करतब दिखाने का
भीड़ कहीं छोड़ न दे
तेरे चेहरे पर थाप को |
तेरे कर्म अच्छे हैं
तेरे धर्म अच्छे हैं
यही वक्त है तेरा
मिटा ले अपने पाप को |
लड़ाई में तेरे सभी साथ हैं
जान ले तु इस बात को
मिटाकर तुझे कोई छोड़ न दे
तेरे कल और आज को |

शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

रूठी किस्मत

एक क्षण को मैं गिरा |
फिर संभला
लेकिन ऐसा लगा
जैसे किसी ने हाथ न थामा |
फिर कुछ दूर और चल पड़ा
अपनी मंजिल के पास |
भरपूर ताकत के साथ |
तुने जब छोड़ दिया
रुख जैसे मोड़ लिया |
फिर जैसे पानी की
बूंदे गिरती रही |
आवाज किसी ने
जैसे न सुनी |
मैं लड़ता रहा
खुद के साथ |
हौसला न टूटे
आज के बाद |
तभी एक फैसला हुआ
सबके साथ एकता हुआ |
तब उसने मुझे बल दिया
फिर कभी न फिसल पाया |

शनिवार, 24 मार्च 2018

विद्रोह की आग

मैं बेखबर था, अपने शहर से
मैं शांत था, अपने कर्मों से |
पर जब कुछ असामान्य लोगों ने
हमारे शहर को खत्म कर दिया
तब मेरे अंदर का शत्रु जाग गया |
मेरे मित्रों ने, मेरे करीबी लोगों ने मुझे समझाया
लेकिन मेरा क्रोध फिर भी कम न हुआ
और मैं प्रतिषोध के लिए निकल गया |
मैंने ठान लिया और सोच लिया
इस घात का प्रतिघात लेकर ही लौटूंगा |
जिन्होंने हमें यह जख्म दि है
उनकी अब जान जाएगी |
जिन्होंने हमारी आवाज रोकी है
उनकी अब सांस रूकेगी |
जब मैं उनके इलाके पहुंचा
तो पहले खुद को तैयार किया
फिर उन्हें ढूंढना शुरू किया |
कुछ वक्त बीता, कुछ साल बीते
लेकिन उन लोगों को खत्म कर दिया
और तब मेरे अंदर के विद्रोह का आग कम हुआ |